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Thursday, February 3, 2011

फूड चेन में गड़बड़ तो नहीं बाघ-हाथी संघर्ष की वजह


हाथी को बाघ अपना शिकार बना ले, इसमें आश्चर्य जैसा कुछ नहीं, लेकिन चार दिन के अंतराल में वह दो हाथियों को मार डाले तो यह निश्चित रूप से चिंताजनक है। खासकर, तब जब ऐसी घटनाओं का केंद्र कार्बेट नेशनल पार्क हो, जहां फूड चेन गड़बड़ाने की कल्पना तक नहीं की जा सकती, लेकिन ऐसा हो रहा है। विशेषज्ञों का मत है कि ऐसे हालात बाघ-हाथी संघर्ष को तेज करेंगे। हालांकि, वन महकमा ऐसा मानने को तैयार नहीं। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) की झिरना रेंज के खाड़ा गेट में रविवार को आठ साल का एक नर हाथी मृत मिला। इसका काफी मांस बाघ ने खाया था, जिससे वन विभाग इसे बाघ के हमले में मारा गया बता रहा है। विभाग का यह भी कहना है कि गत वर्ष अगस्त में बाघ ने हमला कर इसे जख्मी कर दिया था और तब से इसका उपचार चल रहा था। हालांकि, जख्म अब भी पूरी तरह नहीं भर पाए थे, जिसके कारण यह हाथी बाघ का आसान शिकार बन गया। चलो मान लेते हैं कि ऐसा ही हुआ होगा, लेकिन चार दिन के अंतराल में घटना का दोहराव सवाल खड़े तो करता ही है। विशेषज्ञों की मानें तो बाघ समूह में ही हाथी पर हमला करते हैं। कभी-कभार अफ्रीका के जंगलों में ही ऐसा देखने को मिलता है। फिर सीटीआर तो वन्यजीव बाहुल्य वाला क्षेत्र है, जहां हाथियों पर बढ़ रहे बाघ के हमले पारिस्थितिकीय बदलाव की ओर इशारा करते हैं। यह बड़ी असामान्य घटना है। कारण बाघ की टेरेटरी 18 से 20 किमी की होती है। अमूमन वह इससे बाहर नहीं निकलता। इससे साफ है कि रविवार को किसी अन्य बाघ ने घटना को अंजाम दिया। यह इस ओर भी इशारा है कि पारिस्थितिकीय तंत्र कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है और यदि यही सच है तो इस पर शोध होना चाहिये। वन्यजीव विशेषज्ञ डा. रितेश जोशी का कहना है कि बाघ-हाथी के बीच संघर्ष का बढ़ना अच्छा संकेत नहीं है। इससे तो दोनों का ही जीवन खतरे में पड़ जाएगा। ऐसा क्यों हो रहा है, इसका अध्ययन किया जाना चाहिए। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी के राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि अव्वल तो बाघ द्वारा हाथी को मारने की बात गले नहीं उतर रही, लेकिन यदि ऐसा है तो इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।