Wednesday, November 30, 2011

2.4 डिग्री बढ़ेगा दुनिया का तापमान


धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी ने पृथ्वी में मानव प्रेरित ऐसे बदलावों के प्रति चेताया है जिनसे वापस लौटना मुश्किल होगा। संयुक्त राष्ट्र के वि मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने वर्ष 2011 को दसवां गर्म वर्ष बताते हुए कहा कि इस दौरान पाकिस्तान, थाईलैंड, म्यांमा और अमेरिका जैसे देशों पर मौसम की मार ज्यादा रही। संगठन ने 2011 में मौसम ओर जलवायु से जुड़े घटनाक्र म का आकलन पेश करते हुए कहा कि यह साल गर्म रहा और पृथ्वी तेजी ऐसी दिशा में बढ़ रही है जबकि औसत तापमान दो डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के दौरान जारी वैिक जलवायु स्थिति संबंधी रपट में संगठन ने अपने अनंतिम वक्तव्य में कहा कि पिछले 15 साल में 1997 से लेकर अब तक 13 साल अधिक गर्म रहे हैं। आर्कटिक समुद्र में बर्फ का स्तर 2011 में दूसरा सबसे कम रहा। संगठन के महासचिव मिशेल जारो ने कहा हमारी भूमिका है नीति निर्माताओं की गतिविधियों के लिए वैज्ञानिक ज्ञान मुहैया कराना। हमारा विज्ञान ठोस है और यह स्पष्ट रूप से साबित करता है कि वि में तापमान बढ़ रहा है और ऐसा मानवीय गतिविधियों के कारण हो रहा है।जारो ने कहा ‘‘वायुमंडल में ग्रीनहाऊस गैस का जमाव नई उंचाई पर पहुंच गया है। ये तेजी से ऐसे स्तर पर पहुंच रहे हैं जबकि औसत वैिक तापमान में दो से 2.4 डिग्री सेंटीग्रेड का इजाफा हो सकता है और वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे हमारी पृथ्वी, जैवमंडल और महासागरों पर दूरगामी असर होगा और जिसे बाद में बदला नहीं जा सकेगा।
रपट में कहा गया कि लगातार दूसरे साल पाकिस्तान में भयानक बाढ़ आई। इस साल सिंध प्रांत में सबसे अधिक बारिश हुई। पूर्वी एशिया में 2011 के दौरान मानसून का स्तर औसत से बहुत अधिक रहा और थाईलैंड व लाओस सबसे अधिक प्रभावित रहे। उत्तरी अमेरिकी क्षेत्र में अमेरिका का बड़ा हिस्सा विशेष तौर पर टेक्सास सूखे से प्रभावित रहा जहां 2011 के पहले 10 महीने में बारिश सामान्य से 56 फीसद कम रही।

Friday, November 25, 2011

कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का सुरक्षा मानक उच्च स्तरीय % कलाम


परमाणु ऊर्जा के बड़े हितैषियों में से एक पूर्व राष्ट्रपति व प्रख्यात वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम ने गुरुवार को फिर कहा कि कुडनकुलम परमाणु संयंत्र में उच्च स्तरीय सुरक्षा मानक हैं। उन्होंने किसी प्रकार की आपदा की स्थिति में इस संयंत्र से खतरे की आशंका को निर्मूल करार दिया। उन्होंने कहा कि जैव ईधन के इस्तेमाल से मुक्ति के लिए नाभिकीय ऊर्जा एक स्वच्छ संसाधन है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में निर्मित कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। कलाम ने बताया कि वह संयंत्र के सुरक्षा संबंधी मानकों को समझने के लिए खुद तिरुनेलवेली स्थित कुडनकुलम गए थे। पूर्व राष्ट्रपति ने एक गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह प्रमाणित हो चुका है कि सुरक्षा के लिए इस संयंत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है। संयंत्र की संरचना में च्च्च स्तरीय सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि सुनामी की आशंका को दरकिनार करते हुए कहा कि लहरों की ऊंचाई 5.44 मीटर से अधिक नहीं होगी, जबकि संयंत्र 8.7 मीटर की ऊचाई पर है, संयंत्र का टरबाइन 8.1 मीटर, डीजल जेनरेटर 9.3 मीटर और स्विच यार्ड 13 मीटर की ऊंचाई पर है।

जैतापुर परमाणु परियोजना को समिति की हरी झंडी


सुरक्षा को लेकर विरोध के केंद्र में रहे जैतापुर परमाणु संयंत्र परियोजना को सुरक्षा मामलों की समिति ने हरी झंडी दे दी है। इस पर जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने बताया इस परियोजना का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सभा में गुरुवार को डी राजा द्वारा उठाए गए सवाल के लिखित जवाब में कहा कि परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) ने ईपीआर की प्रौद्योगिकी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त की थी। इस समिति ने इसके लिए फिनलैंड तथा फ्रांस में निर्माणाधीन संयंत्रों का दौरा किया। मंत्री ने कहा कि समिति ने फिनलैंड तथा फ्रांस में नियामक प्राधिकारियों के साथ भी विचार विमर्श किया। समिति की रिपोर्ट ने ईपीआर की सुरक्षा तथा दक्षता से संबंधित सभी शंकाओं का निवारण कर दिया है। नारायणसामी ने कहा कि जैतापुर में जिन ईपीआर को स्थापित किए जाने की योजना है उनमें एन-4 और कानवाई रिएक्टरों की तकनीक को लागू किया गया है। वर्तमान में ईपीआर फिनलैंड, फ्रांस तथा चीन में निर्माणाधीन है। उन्होंने बताया कि यह रिएक्टर दो से चार वर्षो में शुरू हो जाएगा। नारायण सामी ने कहा कि इन देशों में चल रहे रिएक्टरों से प्राप्त अनुभव भी जैतापुर परमाणु विद्युत परियोजना के कमीशन से पहले उपलब्ध होगा। इसके लिए न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और अरेवा के बीच शुल्क व्यवस्था को लेकर बातचीत चल रही है। परमाणु संयंत्रों को लेकर दूर हो रहा लोगों का डर परमाणु संयंत्र के खिलाफ लोगों के गुस्से को कम करने के प्रयास में सरकार को कुछ सफलता मिली है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री नारायणसामी ने बताया कि तमिलनाडु के कुडनकुलम और महाराष्ट्र में जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में फैले डर को दूर करने के लिए सरकार ने जो जनजागरूकता कार्यक्रम और लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की थी, उसके बेहतर परिणाम दिखने लगे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने आज राज्यसभा में मोहन सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि रूस के सहयोग से स्थापित किए जा रहे कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा के बारे में उत्पन्न डर और आजीविका खोने की स्थानीय लोगों की आशंका को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान के अलावा लोगों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए गए हैं। राज्य मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र के जैतापुर में पुनर्वास संबंधी मुद्दे को महाराष्ट्र सरकार के साथ परामर्श कर हल किया जा रहा है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लोगों में फैली असुरक्षा की भावना को दूर करने के लिए विशेषज्ञों की एक 15 सदस्यीय समिति भी बनाई गई है। उन्होंने सदन को लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि यह समिति लोगों की शंकाओं को दूर करने के लिए आठ नवंबर और 18 नवंबर को दो बैठकें भी आयोजित की हैं। नारायणसामी ने बताया कि सरकार को इन प्रयासों के अच्छे परिणाम मिलने शुरू हो गए हैं। उन्होंने तरुण विजय के एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में सदन को बताया कि सितंबर, 2011 तक कुडनकुलम परियोजना पर हुआ कुल व्यय 14,122 करोड़ रुपये और जैतापुर परमाणु विद्युत परियोजना पर हुआ खर्च 46 करोड़ रुपये है।

Monday, November 14, 2011

वैष्णो देवी की पहाडि़यों में खनन की अनुमति


केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में स्थित प्रख्यात माता वैष्णो देवी के आसपास के पहाड़ों में मैग्नेसाइट के खनन की अनुमति दी है। इसके लिए जम्मू-कश्मीर मिनरल्स डेवलपमेंट कारपोरेशन का प्रस्ताव लंबे समय से विचाराधीन था। जिन पहाड़ों और आसपास खनन की कुछ शर्तो के साथ अनुमति दी गई है, वह पूरा क्षेत्र वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अधीन है। नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने यहीं पर मैगनेशिया संयंत्र स्थापित करने की भी मंजूरी दे दी है। यहां के पहाड़ों व आसपास के इलाकों से मैग्नेसाइट का खनन किया जाएगा। जबकि इसके पास ही कई लुप्तप्राय वन्यजीवों वाला अभ्यारण्य स्थित है। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से वन्य जीवों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रस्ताव में इस क्षेत्र के चिपरन पहाड़ों से सालाना 12.40 लाख टन हाईग्रेड मैग्नेसाइट का खनन करना और 30 हजार टन की उत्पादन क्षमता वाला मैग्नेसाइट संयंत्र स्थापित करना शामिल है। संयंत्र कटरा जिले के त्रिकुटा वन्य अभ्यारण्य के बहुत नजदीक है। गैर वन्य क्षेत्रों की निजी जमीनों पर वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का अधिकार है। खनन के लिए 485.30 हेक्टेयर जमीन का पट्टा दिया गया है। इसमें से 17.92 हेक्टेयर जमीन से मैग्नेसाइट का खनन किया जाएगा। हालांकि त्रिकुटा वन्य अभ्यारण्य के पास के खनन के लिए कुछ शर्ते जरूर जोड़ी गई हैं। स्टैंडिंग कमेटी को राज्य के वन्यजीव अभ्यारण्य के मुख्य वार्डेन ने सूचित किया है कि राज्य सरकार ने कमेटी के सुझावों के मद्देनजर पूरे क्षेत्र की पहचान शुरू कर दी है। कमेटी ने अपनी मंजूरी के साथ जो शर्ते जोड़ी हैं, उनमें वन्यजीवों की सुरक्षा योजना, जल व भूमि संरक्षण के साथ आसपास की हरियाली को बनाए रखने, चारागाह की सुरक्षा, वन्य जीवों के शिकार को रोकने के लिए सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध और लोगों में जागरूकता लाना प्रमुख है।

Saturday, November 12, 2011

हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण का काम सिर्फ 67 कंधों पर


हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण के जिम्मेदार विभाग को खुद ही संरक्षण की दरकार है। पर्यावरण को स्वच्छ और तंदुरुस्त रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले सरकारी तंत्र में मात्र 67 लोग काम कर रहे हैं। काम का बोझ इतना है कि ये पर्यावरण पर निगरानी तो दूर इन्हें शिकायतें लेने में ही पसीने छूट रहे हैं। पर्यावरण पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बावजूद सरकार अपने कमजोर तंत्र में जान नहीं ला पाई। सरकार के पास मौजूदा जो तंत्र वह भी पर्यावरण में निपुण नहीं है। प्रदेश पर्यावरण विभाग के 67 लोगों के स्टॉफ को 1550 बड़े उद्योग, 80 हजार मंझले व छोटे उद्योग, पांच पांवर प्लांट, दो हजार ईंट भट्ठे, यमुना, घाघर व मारकंडा नदी, स्टोन क्त्रेशर, अरावली की पहाडिय़ां, 21 नगर पालिका, 46 नगर परिषद तथा करीब छह हजार अस्पताल, डिस्पेंसरी, ब्लड बैंक, बैंक, खेतों में अवशेष तथा प्लास्टिक के कैरी बैग पर निगरानी रखनी पड़ रही है। ग्रीन अर्थ संस्था के अध्यक्ष नरेश भारद्वाज ने बताया कि 67 लोगों में से किसी के पास पर्यावरण विषय की डिग्री नहीं है। इस समय प्रदेश में तीन हजार युवाओं के पास पर्यावरण डिग्री है, लेकिन सभी बेकार घूम रहे हैं। भारद्वाज ने पर्यावरण मंत्री तथा चेयरमैन को पत्र लिखकर जिला प्रदूषण नियंत्रक तथा पर्यावरण सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति की मांग उठाई है।