Thursday, March 10, 2011

अब तो यूपी में गांवों का पानी भी प्रदूषित


आम धारणा है कि सेहत के लिए गांव की आब-ओ-हवा मुफीद है। चिकित्सक अक्सर ही रोगी को स्वास्थ्य लाभ के लिए गांव जाने की सलाह देते हैं लेकिन प्रदूषण के प्रकोप ने अब गांवों को भी अपनी चपेट में लिया है। वहां का पानी भी प्रदूषित हो गया है। ग्रामीण इलाकों में पेयजल स्रोतों के पानी में कुछ विषैले तत्वों की जानकारी यदाकदा आती है। इसी के मद्देनजर लखनऊ समेत छह जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के नमूने की जांच की योजना बनी है। हर जिले से दो सौ नमूने जांच के लिए रीजनल फूड रिसर्च एंड एनालिस्ट सेंटर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता अनुश्रवण एवं निगरानी कार्यक्रम के अधिशासी निदेशक, ग्राम्य विकास विभाग की तरफ से लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली व बाराबंकी के मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश भेजे गए हैं। इसके मुताबिक जिले के दस प्रतिशत पेयजल स्रोतों की जांच राज्य स्तरीय प्रयोगशाला में की जाएगी। पेयजल नमूनों को उन स्रोतों से लेना है जिनके जिला स्तरीय प्रयोगशाला एवं फील्ड टेस्ट किट से की गयी जांच में किसी प्रकार के प्रदूषण की जानकारी मिली है। जिले के सभी विकास खंड से कुल दो सौ नमूनों को जांच के लिए रीजनल फूड रिसर्च एंड एनालिस्ट सेंटर, उद्यान भवन परिसर, सप्रू मार्ग, लखनऊ भेजना है। हर नमूने को एक लीटर की बोतल में भेजा जाना है जिस पर स्पष्ट रूप से स्रोत का प्रकार, निकटतम निवासी का नाम, ग्राम, पंचायत और जिले का नाम अंकित होना चाहिए। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि नमूनों की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ग्रामीण पेयजल स्रोतों में किस प्रकार की अशुद्घियां आ रही हैं। क्या यह बीमारियों का कारण भी बन रही हैं। जांच रिपोर्ट में अशुद्घियों की जानकारी मिलने के बाद उसी अनुसार निरोधात्मक कार्रवाई की जाएगी

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