Thursday, March 3, 2011

बारूद से छलनी असी गंगा का आंचल


 उत्तराखंड में कल्दीगाड और असीगंगा फेज-1 व फेज-2 जल विद्युत परियोजना के लिए किए जा रहे बारूदी विस्फोटों ने गंगा की बहन असी गंगा के आंचल को छलनी कर डाला है। मलबे को निश्चित जगह पर डंप न किए जाने से गंगा भागीरथी की इस सहायक नदी के खूबसूरत तट मलबे और बड़े-बड़े बोल्डरो के ढेर से बदसूरत हो गए हैं। ढेरों मलबे के बीच सिसकती नदी किसी तरह अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही है। मानकों की धज्जियां उड़ा कर किए जा रहे धमाकों से वन संपदा पर भी संकट है। उत्तरकाशी जिले के डोडीताल से निकलने वाली असी गंगा करीब 32 किलोमीटर की दूरी तय कर गंगोरी में भागीरथी से मिल जाती है। नदी का खूबसूरत तट सैलानियों को भी खूब भाता है। गंगोरी से कुछ दूरी पर नदी में दो हाइड्रो प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं। इसके लिए आसपास की चट्टानों पर ब्लास्टिंग की जा रही है, लेकिन निर्माण एजेंसी मानकों की धज्जियां उड़ाने से नहीं चूक रही। मलबे की डंपिंग के लिये कोई नियत जगह न होने के कारण चट्टानों से निकला मलबा व भारी भरकम बोल्डर सीधे नदी की ओर लुढ़का दिये जा रहे हैं। जिससे वन्य संपदा को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंच रहा है। तट किनारे की पगडंडियों पर पहाड़ों में अटके बड़े बोल्डर दुर्घटना का सबब बन सकते हैं। जल विद्युत निगम के अधिशासी अभियंात बताते हैं कि निगम द्वारा कार्यदाई एजेंसी को को विस्फोटकों के प्रयोग व मलबा डंपिंग में जरूरी बातों को ध्यान में रखने को कहा जाता है। प्रभागीय वनाधिकारी डा. आईपी सिंह का कहना है कि निर्माण कार्य में वन संपदा को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिये। ऐसे में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बीते वर्ष इसी आधार पर विभाग ने कंपनी को काम रोकने को कहा था|

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