Wednesday, February 23, 2011

गजराज के घर में वनराज का आशियाना


गजराजों (हाथियों) की रियासत राजाजी नेशनल पार्क में अब वनराज (बाघों) का आशियाना संवारने की भी तैयारी है। कोशिश है कि यहां भी वनराज विचरण कर सकें और उनके ठाठबाट में भी कोई कमी न रहे। यह खालिश घर तो नहीं, लेकिन घर सरीखा ही होगा। हालांकि अभी इसमें वक्त लगेगा, लेकिन प्रयास संपूर्ण वन्य जीवन की झलक दिखाने की उम्मीद जगा रहे हैं। आठ सौ बीस वर्ग किमी भूभाग में विस्तारित राजाजी नेशनल पार्क में गजराज के झुंड और इनकी चिंघाड़ सैलानियों को बरबस ही आकर्षित करती है, लेकिन यह पार्क गजराज ही नहीं, बाघों के लिए भी उत्तम पर्यावास वाला है। पार्क की चार रेंजों चीला, गौहरी, मोतीचूर व धौलखंड में बाघों की मौजूदगी इसे तस्दीक करती है। पार्क प्रशासन के मुताबिक वर्तमान में उक्त रेंजों में 10 से 12 बाघ मौजूद हैं। बाघ के लिए अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए पार्क प्रशासन ने अब प्रोजेक्ट टाइगर की तरह अपने यहां भी बाघों के संरक्षण पर फोकस करने का निश्चय किया है। पार्क के निदेशक एसएस रसाईली के अनुसार, पार्क की चार रेंजों में बाघों के लिए उचित पर्यावास है। लिहाजा, वहां भी टाइगर के हिसाब से उनका मैनेजमेंट होना चाहिए। इस सिलसिले में चारों रेंज का सर्वे कर राजाजी में बाघ संरक्षण को कदम उठाने के मद्देनजर प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव को प्रस्ताव भेजा गया है। मामले में उच्च स्तर पर ही विचार होना है। कोशिश रंग लाई तो आने वाले दिनों में गजराज के अधिपत्य वाले राजाजी पार्क में वनराज का घर भी संवरेगा। सैलानियों को गजराज के साथ ही वनराज के भी दर्शन होंगे, जो उन्हें जंगल की संपूर्णता का अहसास दिलाएंगे। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार बाघों के संरक्षण के प्रति बेहत सक्रिय है।


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