Monday, February 28, 2011

पर्यावरण बचाओ मुहिम में बजट बना वाहन


 वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बजट में जंगल, जमीन, हवा के साथ ही नदियों व तालाबों का भी खास ख्याल रखा है। बजट में इन्हें बचाने के उपायों पर 600 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता के अलावा पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए उन पर उत्पाद व आयात शुल्क में छूट का प्रस्ताव भी है। पर्यावरण सुधार के लिए निर्धारित 600 करोड़ में से 200 करोड़ वनों के संरक्षण व नए वन लगाने पर खर्च होंगे। वहीं 200 करोड़ रुपये प्रदूषण नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देने पर खर्च किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने बजट में गंगा के अलावा दूसरी नदियों व तालाबों की भी सुध ली है। सांस्कृतिक व एतिहासिक महत्व की ऐसी नदियों व तालाबों को प्रदूषण मुक्त करने पर 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट में पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने का भरसक प्रयास किया गया है। इसके तहत बिजली की गाडि़यों के कलपुर्जो पर सीमा व उत्पाद शुल्क में दी जा रही रियायत के दायरे को बढ़ाते हुए बैटरियों के आयात को इसमें शामिल कर लिया गया है। वहीं हाइड्रोजन ईधन पर आधारित वाहनों को बढ़ावा देने के लिए उन पर 10 फीसदी का रियायती उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। डीजल-पेट्रोल के साथ ही सीएनजी व एलपीजी या दोनों से चलने वाले हाइब्रिड वाहनों पर रियायती उत्पाद शुल्क के अलावा उनमें लगने वाले कलपुर्जो को आयात शुल्क से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। इसी तरह सामान्य वाहनों को हाइब्रिड में बदलने के लिए लगने वाली स्वदेशी किट व उसके कलपुर्जो पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। प्रणव मुखर्जी ने बिजली की कम खपत करने वाली एलईडी लाइटों को सस्ता करने का रास्ता भी साफ कर दिया है। इनके मूल अवयव एलईडी पर लगने वाली काउंटर वेलिंग ड्यूटी को कम कर दिया गया है। इसी तरह अब सोलर लैंपों पर उत्पाद शुल्क को आधा कर दिया गया है। यही नहीं, कपड़ों की धुलाई में पानी की अत्यधिक खपत रोकने के लिए साबुन में प्रयुक्त होने वाले पाम स्टीयरिंग पर सीमा शुल्क खत्म कर दिया गया है। इसी तरह चमड़ा उद्योग में हानिकारक रसायनों की जगह पर्यावरण अनुकूल एन्जाइमों को बढ़ावा देने के लिए इन एन्जाइमों को उत्पादन शुल्क से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है

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